मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार गिरने के 41 दिन बाद बयान देकर राजनीतिक गलियारे में फिर से हलचल मचा दी है। न्यूज चैनल आज तक से बातचीत में कमलनाथ नेकहा, ''मैं राज्य में अपनी सरकार इसलिए नहीं बचा सका, क्योंकि दिग्विजय सिंह ने उनमें झूठा विश्वास भर दिया था कि पार्टी के कुछ विधायक साथ छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। यह जानबूझकर नहीं किया गया था, लेकिन स्थिति कोठीक से न समझ पाने की वजह से ऐसाहुआ। दिग्विजय ने महसूस किया कि कुछ विधायक जो दिन में तीन बार उनसे बात कर रहे थे, वो कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ेंगे, लेकिन उन्होंने साथ छोड़ दिया।”
चैनल को दियाबयान वायरल होते हीकमलनाथ ने खुद की बात का ही खंडनकरते हुए कहा कि "मेरी सरकार गिरने के मुद्दे पर बातचीत में मैंने चैनल सेकहा-"स्वयं मुझको और दिग्विजय सिंह को कुछ विधायकों ने झूठा विश्वास दिलाया था कि वह वापस लौट आएंगे, उनके झूठे विश्वास पर हम दोनों ने भरोसा किया और हम अपनी सरकार नहीं बचा पाए। यह चर्चा अनौपचारिक थी और इसमें कहीं भी मैंने यह नहीं कहा कि दिग्विजय सिंह ने झूठा विश्वास भरा था, इसके कारण सरकार नहीं बची।"
सिंधिया जुलाई से भाजपा के संपर्क में थे
कमलनाथ नेकहा, “जहां तक ज्योतिरादित्य सिंधिया का सवाल है, मुझे पता था कि लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह जुलाई से भाजपाके संपर्क में हैं। वह इस बात को कभी पचा नहीं पाए कि वह एक लाख से अधिक वोटों से लोकसभा चुनाव हार गए। वह भीउस उम्मीदवार से जो कभीकांग्रेस का साधारण कार्यकर्ताथा। जिसे भाजपाने अपने पाले में लेकर उनके खिलाफ चुनाव में उतारा था। सिंधिया अपनी हार के बाद बीजेपी के संपर्क में थे, लेकिन बीजेपी की राज्य इकाई ने उन्हें कभी नहीं चाहा। बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व किसी भी कीमत पर मध्य प्रदेश से दूसरी राज्यसभा सीट चाहता था। इसलिए उन्होंने सिंधिया को भाजपा की सदस्यता दिला दी।”
20 मार्च को अल्पमत में आने के बाद गिर गई थी कमलनाथ सरकार
सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफेके कारण कमलनाथ सरकारअल्पमत में आ गई थी। 20 मार्च को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बारशपथ ली थी। शिवराज नेशपथ लेने के28 दिन बाद 21 अप्रैल को मंत्रिमंडल का गठन किया।इसमें 5 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई।
कमलनाथ का दावा- उपचुनावों में 15 से ज्यादा सीटें जीतेगी कांग्रेस
मध्य प्रदेश उपचुनाव को लेकर भी कमलनाथ ने कई दावे किए।कहा, "यह आंकड़ों का खेल है। अभी हमारे पास 92 विधायक और उनके पास 107 हैं। 24 सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं।इसमें कम से कम 15 सीटें भाजपाके बराबर आने के लिए जीतनी होंगी। बाकी 7 विधायकों का काम 4 निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा मिलकर करेंगे। स्थितियां अभीऐसी हैं कि हम 15 से ज्यादा सीटें जीतेंगे। "
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